कितना
अनमोल व चिरस्मरणीय विचार पाया हैं
महान
हस्तियाँ
कभी खुद का मूल्य न लगाती हैं
वह
तो हर किसी पर प्यार मान लुटाती रहती हैं
हर
गैर की नजरों में पा जगह अकेले खुद ब खुद
आदर्श
कदमों के निशां बना अनमोल हो जाती हैं
पूर्वजों
की अनमोल धरोहर जिल्दों में बंद होती हैं
जैसे
करता बंद इंसा खुद भी आत्मिकरूप खोता हैं
तभी
स्वर्ग जैसी भूमि के रास्ते दर्दीली कहलाते हैं
हम
मार्ग व मूल्यवान लाभप्रद विचार भूल जाते हैं
फिर
क्यों खुद को सर्वश्रेष्ठ योनि का कहलाते हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
ब्लाग – सूनी राह का पथिक (https://www.blogger.com/home)
यदि
उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें
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