बुधवार, 16 दिसंबर 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक ७६८ -- चरित्र मोती हैं -- पथिक अनजाना

लोग जमी पर आ जाने क्यों प्यार किसी से करते हैं
कोई धन,कोई तन से,मन से पद से तो कोई गन से
कोई यार खोजता तो कोई यहाँ बाजार व कोई मजार
कहा किसी ने अगर स्वंय से प्यार करते हो तुम यहाँ
तो जानो तुम खुद हो अपने प्रतिस्पर्धी इस जहान में
मान कीमती पर अधिक कीमत चरित्र की हो जाती हैं
मान खरीदा जा सकता हैं पर नही चरित्र बिक पाता हैं
मान आडम्बरी हो जाता हैं चरित्र सदा सराहा जाता हैं
देखा मान हेतू दौड हैं,  सुविचार दे भैंट चरित्र मोती है
सुविचारों,सदच्चरित्रता इर्ष्याहीन,मानदौड इर्ष्यालु हैं
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)


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