हमने
पहले
लिखा
यह
कि
आशा
निराशा
की
जननी
रही हैं
जानें
विरक्ति आसक्ति सिमटते
स्वभाव के मूलाधार हैं
आशा
मांबाप से संतान से आशा समाज व समुदाय से
आशा
मित्रों रोजी नौकरी व्यवसाय आशा देश कानून से
आशा
परिवार प्रकृति व आशा रब व अपनी हर सांस से
सदैव
अपूर्ण होती आंशिकरूपेण अपवादित शेष अकाटय
मजे
की बात आशा इंसा को भगवान को हैवान को भी
ग्रन्थों
हर पन्ने पर कहे चाहत ईश्वर की सभी उसेपुकारे
अर्थ
वह फंसा आशा के वशीकरण में जो निराशा फैलाती
ब्रम्हाण्ड
हुआ दीवाना नर्क या स्वर्ग दर्शन कराता हंसाता
शिंकजे
से बिरला बाहर हैंजो भार सफलता से उतारता हैं
सुख
शांति हो वहाँ जहाँ आशा निराशा न आवे जागो अब
अवसर
योनि का ले सको लाभ इनको यदि तुम दफनाओ
न
लिप्त हो लोभों अंहकारों विचारों में राह सही अपनाओ
पथिक
अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
प्रस्तुत उदगार रचियता कि पुस्तक सूनी राह का पथिक
का अंश हैं
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