सोमवार, 10 अगस्त 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक – ७५३ --- जो उधार हुआ करता हैं --- पथिक अनजाना

चाहे मांग लो तुम क्षमा यारों से तहेदिल से
पर रखो याद  ताउम्र बात हर सांस में मेरी
नही क्षमा निशान मिटाती नासूर बना देती हैं
सो करने कहने से पहले आगाज को तौल लो
घटना घटित से पहले तुम आवाज को मोल दो
अहं से विचार  कर्मों का इजहार हुआ करता हैं
यही जन्मता भविष्य जो उधार हुआ करता हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
यदि उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें


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