रविवार, 27 सितंबर 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ७५९ -- बहुत मुश्किल -- पथिक अनजाना

बहुत मुश्किल हैं इंसानी काया व चरित्र पहचानना
बहुत मुश्किल हैं नियंत्रण निर्देशों का यहाँ मानना
बहुत मुश्किल हैं प्रगतिशील सौन्दर्य को निहारना
बहुत मुश्किल हैं दलदल से स्वंय को यहाँ उबारना
जिन्दगी अनुभव के निर्देश पर दलदल छोड दिया
नई राह पाये आशावादिता का रूप हम जान गये
भौतिक शान, मान ज्ञान की हमें अब चाह न रही
प्रकृति के प्रति दायित्व के विचार याद आ ही गये
बन्धु,परिवार के विचार अब बीता कल कहला गये
व्यर्थ उम्र गंवाते रहे व दलदल में गोते लगाते  रहे
यह नदी के दो किनारे यही सत्य हमने जान लिया
शेष उम्र प्रकृति विचार व सेवा को तो पहचान लिया
हम क्या खुदा भी न समझे इंसान यह मान लिया
पथिक   अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी )
ब्लाग सूनी राह का पथिक


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