मेरे
यार जिस सेवा व मुहब्बत
में
कोई
स्वार्थ
व
शर्त
नही
होती हैँ
वह
तो नायाब तोहफा हैँ जो देना व लेना हर शख्स चाहता है
हर
ऐसी सेवा व मुहब्बत में मिलता सदा ही स्वर्गीय आन्नद
बेशकीमती
अमृतफल जो नसीब होता नही जन्नतवालों को है
पर
सेवा मुहब्बत बरसाने के पहले पात्र को गहराई से जान लें
न
तो सेवा व मुहब्बत निकम्मों की संख्या समाज में बढायेगी
न
ही किसी से सेवा व मुहब्बत की आशा आप कभी भी करें
कर्ता
को निर्णय लेने दें चूंकि अपना निर्णयतो आप कर रहें हैं
हो
शांत समय हालातों के बने गर गवाह जिन्दगी नही खोती हैं
ब्लाग
-- सूनी राह का पथिक
पथिक
अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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