साकी ने पूछा पथिक कैसे आप रचनायें रचते हैं
जवाब मिला उसे धोखेबाज हैं अपने व यार मेरे
उन्हें सदा करता मना न लायें मुझे मयखाने में
आ यहाँ मेरा दिलोदिमाग ख्यालों में खो जाताहैं
बेखबर हो जाते हम अलफाज निकलने लगते हैं
मयखाना कब था मेरा यार बेनकाब हो जाते हैं
लूटते यहाँ पर तमाशबीन अपने व यार मुझे हैं
लोग राह में लूटते हम मयखाने में लूटे जाते हैं
रहजन वस्त्रों को न छेडते ये वे भी न छोडते हैं
राह में पथिक अनजाना यहाँ शिकार कहलाता हू
नही दोष देता गैरों को मैं दुनियायी मयखाने में
अंह,काम, आदि अपने व यार कहलाने लगते हैं
मैं खुद ही तथाकथित अपना व यार बन जाता हू
नग्न जग को करे यार,अपने तब मैं रच जाता हू
ब्लाग -- सूनी राह
का पथिक
पथिक अनजाना
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