शासक को अमर कुर्सी हेतू निर्णय अदभूत
लेने होते हैं
वाचक को ज्ञान-वृद्धि हेतू दिमाग लाकर में सजाना होता
याचक को युग वर्तमान में नये आकर्षण बनाने होते हैं
भाजक को दुविधा नही शिकार स्वंय चलकरआ जाते हैं
वर्ष लगभग 70 पूर्व के हीरो की संतानें नौकरी
पाजाती
मानें उम्र तब 20 रही अब हो गई 10 कम 100 करीब
संतान 50—60 की, सेवानिवृति आयु पर सेवा पा जावेगी
विचारणीय विषय क्या महान वीर अमृत कलश ले भागे
कितना किया त्याग वे हीरो अब भी अवसर को न त्यागे
न बूझे पथिक मूढा भटके बेरोजगार भाग्य किसी के जागे
चिरंजवी रहें सूची फूले फले कहानी न उतरे यह मेरे गले
क्षमाप्रार्थी मैंचूंकि समझना गुनाह नही समझाना गुनाह हैं
विचारना गुनाह न विचार प्रदर्शन से होती फिजां खराब हैं
ब्लाग – सूनी राह का पथिक
सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)
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