देय
देय
देय
देय
हैं
देय
ही
हैं
हमें
हर
पल
चारों
ओर यारों
देय
केन्द्रिय शासन कोअपनी कमाई का हिस्सा यार
देय
राज्य शासन को अपनी कमाई का हिस्सा यार
देय
समाज को अपनी मेहनत कमाई का हिस्सा यार
देय
समुदाय अग्रणियों को अपनी कमाई का हिस्सा
देय
गुन्डों छुटभैये नेतागणों को तेरी कमाई का हिस्सा
देय
संसारिक कार्य करवाये जाने हेतू रिश्वत में हिस्सा
देय
पुलिस,क्षेत्रिय
अधिकारियों को कमाई से हिस्सा दे
देय
परिवारकर्ता होने के नाते
अर्पित सब कुछ कर दे
देय
वह ऋण जो बुजुर्गों ने तेरे खातिर था खर्च किया
देय
स्वहितार्थ या इच्छाओ के
लिये देना तुझे ही होगा
नित्य
कमाना कुछ घन्टों तीखी नजरो वालों में रहकर
निकले
वहाँ से लपलपाती जिव्हों से भेडिये तेरी राह में
खुदा
भी शायद रोता होगा रे बदहाली तेरी देख इंसान
हकीकत
से मुंह नही मोडा जाता सलाम फर्शी तुझेमेरे
ताउम्र
देय देय के मध्य भी यह बाँवरा मुस्कराता
हैं
धन्य
तू फिर भी सजा अपने बाप खुदा से पा जाता हैं
बुरा
न मान इतनी दशवन्तें देकर भी कष्ट तू पाता हैं
ब्लाग --
सूनी राह का पथिक
सतनाम सिंह साहनी ( पथिक अनजाना )
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