जब वक्त के साये
में इंसान तू लाचार होता हैं
जब लहरों पर सवार मुश्किलें राह
तेरी आती है
बस थाम कर रख
आत्मविश्वास की पतवार को
सारी मुश्किले हो सवार लहरों
पर गुजर जावेगी
क्यों सोचता
पिछला अगला वक्त व जहान की
जिन्दगी गुजारे
बेवजा सहे घडियाँ अपमान की
सोच वह तू यहाँ
कदमों के निशां कैसे बनावेगा
गर खुद पर नही
यकी तो यकी किस पर करेगा
चिन्ता में
जन्मा,जिया चिन्ता में क्या तू मरेगा
न बोझ तेरा कोई
तू नादानी में जीवन खोता हैं
सोच किस वस्तु
के बदले यकीं खुद का खोता हैं
सतनाम सिंह
साहनी (पथिक अनजाना)
ब्लाग -- सूनी राह का पथिक
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