शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ७३२ -- नही क्यों यह शोध –विषय -- सतनाम सिंह साहनी



सुख सुविधा संपन्न होते होते इंसानी  शांति क्यों खो जाती हैं ?
सास- ससुर के आने की सुन कर बहुयें बीमार क्यों हो जाती हैं ?
मायके वालों को पाके बहुओं की मुस्कानें इन्द्रधनुषी हो जाती हैं ?
पानी बरसने की संभावना से चिडियायें क्यों जा धूल से नहाती हैं?
दु:ख, इर्ष्या की इंसान हाय अभिव्यक्ति किस्मत क्यों कहलाती हैं?
मर्यादायें.लांघने की हलचलें क्यों लक्ष्मण रेखा पार कर जाती हैं?
न समझा पथिक अनजाना क्यों नही शोध – विषय बन पाती हैं?
उन्नत समाज पर मूल इंसानी इच्छायें क्यों उपस्थित हो जाती हैं?
निर्धन की आशायें नही क्यों सफलता के शिखर पर चढ पाती हैं ?
सुख सुविधा संपन्न होते होते ------
 blog --   सूनी राह का पथिक


सतनाम सिंह साहनी  (पथिक अनजाना )

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