शनिवार, 14 फ़रवरी 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक - ७३१ -- कृष्ण को नींद क्यों आई --- सतनाम सिंह साहनी

हर क्षण द्रौपदी का चीर हरण क्यों हो रहा हैँ
कृष्ण न जाने कहीं लेटा बेखबर सो रहा हैँ
हर पल मिटती बनती नई लक्ष्मण रेखा हैँ
देख कहीं खडा रावण अचम्भित हो रहा हैँ
चीरहरण के वक्त कृष्ण को नींद क्यों आई
हुई खोखली वे शक्तियाँ किवदंतियाँ कहलाई
प्रसिद्ध अग्नि परीक्षा की अब बात क्या करें
इंसा की जीवनपर्यन्त हर पल होती परीक्षा हैँ
ब्लाग --  सूनी राह का पथिक

सतनाम सिंह साहनी ( पथिकअनजाना )



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