चलो छोड दो दोषों रोषों बेहोशों मदहोशों को पहचानना
रिश्तों नातों उलझे ख्यालों की अब न कभी राख छानना
मिले छूट जावेंगे या छोड जायेंगें साथ सफरी हैं जमाना
इन्हें दुनिया में मस्त रहने दो तुम राह अपनी पहचानना
जिनसे उलझते सुलझते रहते व डुबोते खुद को प्यार में हो
सांसें बहुत कम बाकी सुध दायित्व निभाने की तुम यार लो
सुनो आवाज आत्मा की प्रकृति सेवक खुद को पहचानने दो
साथ हो प्रकृति सेवा करो
खुद के दुनियायी दाग छुडाने दो
पहले रोते खीझते रहे तुम अब नयी राह पर दीप जलाने दो
शायद जले दीपों की रोशनी में राह तुम्हारी आसां गुजर जावे
हमराहियों की नजरों में पथिक अनजाना पथिक बन जावे
ब्लाग सूनी राह का
पथिक
सतनाम सिंह साहनी
पथिकअनजाना
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