यार
मेरे रिश्तों को सुधारने के लिये कभी
वक्त
बेवक्त नही होता जिन्दगी में कभी
रिश्ता
व प्यार के पथ पर जाने हेतू कभी
कोई
दिल सख्त इतना होता नही देखा हैं
माना
कि शिकायतें होती अपनों से सदा हैं
यह
मान चलो अपना कहलाने की अदा हैं
राह
हर अपनी चुनता देता तू क्यों सजा हैं
चलने
दे सबको पथ पर जीने का मजा हैं
ब्लाग
-- सूनी राह का पथिक
सतनाम
सिंह साहनी (पथिकअनजाना)
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