देखिये
बाकी जिन्दगी न जाने क्या गुल खिलाती
हैँ
कहानी
आकर किस मोड पर बाग
बाग हो जाती है
गुल
गुंलिस्तां के करीब से हो यूँ जिन्दगी गुजरी हैं
मानो
इस जिन्दगी को सुखों से कोई
वास्ता नही है
या
परिभाषा पहचान सुखों की कभी जानी ही नही हैं
दु:खी
भी नही रहा कभी मैं,इंतजार की कहानी रही हैं
पथिक
अनजाना
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