कहते हैं कि भाग्यवादिता इंसान को नपुंसक बना देती हैं
कहते
हैं कि कर्म करने पर ही तुम मंजिल पा सकोगे
सवाल
सुकर्म करने का प्रोत्साहक वातावरण कैसे लाये
सुकर्मों
की लग्नशीलता में अन्य लाभ सुख क्यों ठुकरायें
माना
सुकर्म पक्ष में ही फलित होते इंतजार क्यों कराये
फल
का वक्त स्थान दिशा मात्रा सब कुछ अनिश्चित हैं
कार्य
की असफलता का मूलकारण भाग्य क्यों बनता
हैं
मिली
जब विजयश्री तब मुख्यतःक्यों सराहा इंसा जाता हैं
भाग्य
यहाँ गौण क्या बुजर्गों के विचार को माना सही जावे
समझ
न पावे भाग्यबली या सुकर्म किस राह पर इंसा जावे
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सूनी
राह का पथिक
सतनाम
सिंह साहनी (पथिक अनजाना )
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