शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक -७२३ -- सौदा क्षणिक हेतू क्यों ? - -- सतनाम सिंह साहनी



प्रत्येक  इंसान का सबसे बडा दुर्भाग्य जग में यही हैं की               
वह अपना समय धन श्रम सुख शांति एंव भविष्य की
निराधारी या आधारी चिन्ता हेतू हवन किया करता हैं
जबकि जानता कि हाथ उसके न ताकत न और कुछ
व्यर्थ यह तमाम पूजा हवन पूछताछ न कोई हित में
चिन्ता से बचने हेतू कुपथगामी दुष्कर्मी बन जाता हैं
फिर सुख क्षणिक पावे दु:ख गहरे लम्बे वह पा जाताहैं
फैसला खुद के हाथ में सौदा क्षणिक हेतू क्यों करता हैं
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सूनी राह का पथिक           
सतनाम सिंह साहनी (पथिक अनजाना )



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