रंगीन
नजारे मेरे करीब कही मौजूदगी बता रहे
ये
खुश्बू ये हवायें ,बन्धु मुझ को नही कबूल हैं
दिलोदिमाग
की बात को वह कबूल नही करते हैं
रंगीन
नजारों खुश्बीमयी हवा का झौंका कह गया
सुन
यही फासला जो ताउम्र मेरी तेरी में रह गया
जाने
कैसे यह विचार दिलोदिमाग पर छा गये हैं
नही
सुनते मेरे ये कान यह झौंके क्या गा रहे हैं
पथिक
हैंअनजानी राह के नजारे नही लुभा रहे हैं
देख
सुन रहे दिल की नजरें कुछ और चाह रहे हैं
समझ
जाये मुझे गर तो कृपया राह मुझे बतायें
पथिक
अनजाना / सतनाम सिंह साहनी
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