निगाहें हजूर की हो, बाहें दस्तूर की हम थामे रहे
नाचीज
वो गुलाम खुदा के खुदा की हाँ में हाँ कहे
जो
मुकरा दस्तूर से वह इंसा नास्तिक कहला गया
जो
करता रहा शुक्रिया इंसा आस्तिक कहला गया
कहते
नही विज्ञान कोई और जहाँ को हैं चला गया
पथिक
अनजाना अनदेखे खुदा पर मजबूर हो गया
राह
किनारे बिखरी छटा में रमकर मशहूर हो गया
न
हो मजबूर खुदा के लिये दें ध्यानअपने कर्मों पर
देख
तालिका सुकर्मों की खुदा सिर को झुका देगा
ब्लाग --- सूनी राह के पथिक-- jasmeh
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पथिकअनजाना
/सतनाम सिंह साहनी
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