बौराया हैवांन
कठघरे में खडा इंसा है ,हैरां हुआ हैवां हैं
जिसमें खडा होना था उसे खडा इंसा हैं
हैरां हो रहा हैवां लगाते गले उसे इंसा हैं
न लगाते उन्हे गले हमसफर जो यहाँ हैं
हर प्रश्न व जगह पर शक की निगाहों में
खडा करता इंसा सदैव हमसफर इंसा हैं
बौराया हैवांन वह हैवा या इंसान हैवां हैं
पथिक अनजाना सोचता कैसा ये जहाँ हैं
पथिक अनजाना सतनाम सिंह साहनी
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