शनिवार, 10 जनवरी 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक - ७१० -- श्रृम व्यर्थ न जाने दे ---- पथिकअनजाना

यारों जो इंसान होते कमजोर वह सदैव संसार में          
समस्याओं को उपजाते या खींचते रह जाते हैं
समस्या सुलझाने हेतू जन-जागृति अनिवार्य हैं
पुर्नावृति न हो सामूहिक जानकारी सही विचार
जो होते इंसा धैर्य बुद्धिवान वह सदा संसार में
समस्याओं को हंसते हुये सुलझाते रह जाते है
श्रृम व्यर्थ न जाने दे तभी तो इंसा कहलाते हैं
Mail  

पथिक अनजाना---सतनाम सिंह साहनी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें