शुक्रवार, 9 जनवरी 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक - ७०९ -- सारी सूझबूझ बेकार हैं --- पथिकअनजाना



चाहने वाले पूछते हैं कि सूझबूझवान होकर भी यार
तुम सफल क्यों न हो सके इस दुनिया के बाजार में
जवाब दिल का  ताउम्र देखे जग के चाल ढाल ख्याल
सो यार बिन मर्जी व सुकर्मों की सारी सूझबूझ बेकार 
--पथिक अनजाना सतनाम सिंह साहनी


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