चाहने वाले पूछते
हैं कि सूझबूझवान होकर भी यार
तुम सफल क्यों न हो सके इस दुनिया के बाजार में
जवाब दिल का ताउम्र देखे जग के चाल ढाल ख्याल
सो यार बिन
मर्जी व सुकर्मों की सारी सूझबूझ बेकार
--पथिक अनजाना सतनाम सिंह
साहनी
यह उदगार रचियता सतनाम सिंह साहनी ( पथिक अनजाना) के दारा ब्लाग सूनी राह का पथिक ’पर मूल रूप से लिखा गया पूर्णत: या आंशिक रूप से कही भी प्रकाशन की अनुमति नही हैं मानवीय जीवन की दैनिक हलचलों से प्रेरित हो रचनाकार का्व्य रूप से लिपिबद्ध करता हैं मेरा उदेश्य किसी की भर्त्सना, उपहास या कटाक्ष: नही हैं https://jasmehblogspot.com
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