गुरुवार, 8 जनवरी 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक - ७०८ ---- चिल्ला कर गर सुख मिले तो — पथिक अनजाना



परिभाषा वीटो-पावर की बदल गई विधियाँ-रीतियाँ कहाँ रही
मिला कुल खोज गहनता से पाया जन्मी यहाँ नई कहानी हें
अब समाज या पारिवार सदस्य स्थान सशर्त सुरक्षित चाहे हैं
पुत्र-पुत्री बहू दमाद व नाबालिग आरक्षित वीटो-पावर चाहते हैं
नई कहानी में वीटो-पावर सहित सुरक्षित स्थान के हकदार हैं
रिश्तों के महत्व मान रेखा जाननी हैं तो बातें उनकी माननी हैं
चिल्ला कर गर सुख मिले तो क्यों न यह राम-बाण वे चलायें
इज्जतदार शोर से डरते तों क्यों न अंतिम शस्त्र रूप अजमायें
हर परिवार की आन्तरिक कहानी यही पसन्दीदा बनती जा रही
विगत मर्यादाये विगत हुई स्वागत-योग्य नई मर्यादाये हो गई हैं
दबी जुबां स्वीकारते बुजर्ग पुरानी मानी नीतियाँ जाने कहाँ सो गई

पथिक अनजाना—सतनाम  सिंह साहनी

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