जीने का गुरूमंत्र तो पा गये हैं आप
हमें सिर्फ जीने की तुम राह दिखा दो
माना हें नही खुशनसीब हम जमाने में
दीप आप बने हमें दीपस्तम्भ बना दो
ताकि रहगुजर उठा नजर मान से देखें
बाद हमारे निशां बने उदगारों के लेखे
ताउम्र कद्र न हुुई ऐसे सपन क्यों देखें
पथिकअनजाना कृपया दिलों से न फेंकें
-- सतनाम सिंह साहनी (पथिक अनजाना)
हमें सिर्फ जीने की तुम राह दिखा दो
माना हें नही खुशनसीब हम जमाने में
दीप आप बने हमें दीपस्तम्भ बना दो
ताकि रहगुजर उठा नजर मान से देखें
बाद हमारे निशां बने उदगारों के लेखे
ताउम्र कद्र न हुुई ऐसे सपन क्यों देखें
पथिकअनजाना कृपया दिलों से न फेंकें
-- सतनाम सिंह साहनी (पथिक अनजाना)
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