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समूहजीवी का समूहों
पर शासन होता हैं
इंसान जो अधिकाश
करे सम हू सम हू
विचारक व विनाशक
बनता साथ शासन
करने की मंशा उसकी तो बनी रहती हैं
इंसानों की जमात बुद्धिजीवियों के
फैसले
ये कभी एक से जाने क्यों नही होते हैं
परस्पर चेहरा देख हाँ में हाँ मिलाने
की
इंसा की गुलाम प्रवृति इंसान में होती
हैं
उचित अनुचित का विचार नही बुद्धि से
संपन्न होकर भी हुक्मानुसार तत्पर हैं
मानसिकता इनकी आश्चर्यजनक मानी हैं
बाद मरने काल्पनिक नगर व कब्र बनाते
यहीं नही जन्म अगले की दुनिया सजातेहैं
हंसे पथिक इस घडी में छोड के जीना इंसा
अगले पिछले जन्मों की देव दैत्य बनाते
हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी )
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