जग में आकर तुम्हें ध्यान
रखना हैं
दूसरों के दुखों के
निर्माता न बनना हैं
स्वार्थी कामी व्यसनी व
कुचालकों के
खिलाडियों के भ्राता न कभी
तुम बनो
रखो सदैव मष्तिक स्वच्छ व
नियंत्रित
त्वरित सही निर्णय लेने
हेतू जीवन में
जो बोले झूठ स्वंय से वह
महामूर्ख हैं
कोशिश बनावे सागर में बालू
से सेतूहैं
बात कोई महान कहें या कोई
अनजान
काम तुम्हारा सुनना लगाकर
उसे ध्यान
म्यान खाली रखें जिसमें सार्थक
कृपान
जाहिर अनजाहिर काट सको तुम
बान
छिपे सारे रहस्य राह के
बातों में होतेहैं
रहोगे जितने तुम चुप सुन
तभी पावोगे
बाह्य व भीतरी आवाज अलग
सजावोगे
विवादों से दूर पथिक साथ मुस्करावोगे
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह
साहनी)
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