भावी अनजानी जीवनसंगनी पर
विश्वास यह पहली शर्त
ताउम्र विश्वास हर मोड व
सीढी से हो गुजरना दूजी शर्त
फिर हमें खुदा पर विश्वास
करने में ही शंका क्यों होती है
उत्तर नहीं देखा खुदा को
किसी ने पर एहसास जरूर हुआ
सुकर्मों की मुद्रा काम आई
नाम खुदा का कि कबूली दुआ
जीवनसंगनी साथ होती जो
दिखाया जाता मानते सत्य है
कहते कबूलने सिवा चारा नही
बिना पत्नी गुजारा नही हैं
यही निर्भरता सुकर्म-पथ पर
क्यों नही करते भटके इंसान
जहां मुठ्ठी में बन्द हेतू
बेताब असफलता पर दोषी गैर क्यों?
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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