रविवार, 30 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ६७० - शुक्रिया यारों का --- पथिकअनजाना

बेहद शुक्रगुजार उनका जो मेरी पोस्ट चोरी किया करते
ये बेहत्तर उन लोगों से जो पा पोस्ट पन्ने को पलटते
कर चोरी गर भेजते अपने नाम से प्रचारित तो करजाते
पढ समझ  कुछ चेहरे कही दुनिया मे मुस्करा जाते हैं
पा यह अमूल प्रतिफल एहसानमन्द पथिक अनजाना हैं
खुशी इस बात की कि करते चोरी पर आत्मा जीवित हैं
बात मेरी भा गई सो उनको पसन्द मेरी पोस्ट आ गई
पूछोगे पथिक शुक्रिया की वजह जवाब तिहरा लाभमिला
मुस्कानें, प्रचारक मिले बिन बुलाये प्यारे विचारक मिले
पथिक धन्य शांत,चोर ताउम्र अपनी नजरों से गिर गये
पथिक  अनजाना


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