शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक - ६६८-- उजड रही वादियाँ — पथिक अनजाना

गर आपने कभी दफ्न किये थे कुछ या छिपाये कुछ चेहरे
जिन्दगी में वही चेहरे किसी रिश्ते के नाम से आ जाते हैं
चाहर गर खुशनुमा माहौल की व खूबसूरती की आपको हो
अत: यार दफ्नाये पनपायें वही चेहरे जो चाहत आपकी हो
खौफत अपने ही चेहरों से इंसान को तो इस कदर जलाता हैं
जीव ऐसा इंसा सत्य अस्वीकारता घबरा क्रान्ति सुलगाता हैं
ज्वाला खुद नही बनता पर वह जयमाला पा जाना चाहता हैं
जब खुद को नही जलावोगे तो दुनिया को क्या राह दिखावोगे
सामने आपके उजड रही वादियाँ उन्नति दे नाम खुश होते हो
हंसता पथिक कर इकठ्ठा वीडियों प्राकृतिक सौन्दर्य संजोते हो
सौन्दर्य प्रेमियों न सम्हले आप तो सृष्टि को कौन सम्हालेगा
आपका प्राकृतिक सौन्दर्य प्रेम इतिहास वीडियों का हो जावेगा
सामने आपके पथिक अनजाना यही वेदना यहाँ पर  बतावेगा
आ जावो यारों उस पथ्थर पर  राहियों को सही राह दिखावेगा
सूनी राह का पथिक
https://jasmehblogspot.com
सतनाम सिंह साहनी

पथिक अनजाना

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