शनिवार, 29 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ६६९ - काबिल शमा हो जाईये --- पथिक अनजाना

सिर्फ मुश्किलात के वक्त ही दोस्ती नही पनपती हैं
मुश्किलात के वक्त तो दोस्ती और मजबूत होती हैं
मुश्किलात वक्त खातिर दोस्त चुन लेना योग्यता हैं
कितना बोझिल कितने काम आये यारी की राह में
बुनियादी सवाल व आपके ख्याल दोस्ती का रक्त हैं
नियत व गोपनीयता यारी को शक्तिशाली बनाती हैं
प्रशंसक बहुतेरे भीड बहुतेरी, पर दोस्त विरले पायेंगें
मुश्किलात हो या न,सहारे हेतू दोस्त नही हिचकायेंगें
गर हैं काबिल दोस्ती के, दोस्त यकीनी मिल जायेंगें
पहले खुद काबिल शमा हो जाईये परवाने आ जायेंगें
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)



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