रविवार, 9 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ६४८ -- मत सोच सूर्यास्त हो रहा तेरा --- पथिकअनजाना

यार मेरे सीखने के लिये कभी भी उम्र मायने नही रखती
जो उम्र की हदें मानते हैं वे सीखने में असफल हो जाते हैं
असफल यारों की असफलता के कारणों में यह एक होता हैं
गर कतरावोगे सीखने से निश्चित मानो कर्म क्या सोजावेंगें
ज्यादा उम्र बताती जिन्दगी को कितनी गहराई से देखा हैं
अनुभवों में पक्की तुम्हारे चुनावों पर नही लक्ष्मण रेखा हैं
दुनिया व जिन्दगी की गंदगी से कितना बचा सके खुद को
हर नयी सीख उम्र घटाती बढाती नही वह बढाती सुध कोहैं
मत सोच सूर्यास्त हो रहा तेरा वर्ना हारेगा जीते युद्ध को हैं
पथिक   अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी )
ब्लाग सूनी राह का पथिक

यदि उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें

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