बुधवार, 5 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ६४४ -- अपने सच्चे दोस्त आप बन जायेंगें --- पथिक अनजाना

जो भी दोस्त तुम्हारी मुहब्बत व संबंधो की खातिर
तुम्हारी गलतियों को हमेशा ही नजर अंदाज  करें
न चुनो ऐसा दोस्त तुम न ऐसा सुलभ सहारा यार
आडम्बर स्वार्थ जाने पर कब न जाने वह बर्बाद करे
न पछतावा न रोष हो उस तथाकथित यार पर कभी
तो न जीते बर्बाद गुलिस्तां देखो यारी के व्यापार पर
जिन्दगी में यार चुनना हर इंसान के बस में नही हैं
हमसफर,रहनुमां व तमाशबीन बहुतेरे आयेंगें राह में
न खुश न नाज करना फूलों की भरमार की चाह में
तुम्हारे दर्द औषधि ये नही जंगली फूल साथ आयेगें
विचारी बात मेरी अपने सच्चे दोस्त आप बन जायेंगें
राह सच्ची बता यारी की कीमत पर तुम्हें आबाद करे
पथिक   अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
ब्लाग सूनी राह का पथिक http://jasmeh.blogspot.com
यदि उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें


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