मंगलवार, 4 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ६४३ ज्ञात हो तुम्हारी परीक्षा --- पथिकअनजाना

ज्ञात हो तुम्हारी परीक्षा जीवन में हर पग पर हैं
चाहे बनो क्षमाकर्ता दान या सेवाकर्ता नेतृत्वकर्ता
अहंकार प्रतिफल की आशा हीतुम्हारा पथ खोती हैं
ईष्यालु चोट करते रहे पर पथ से भटकना न यार
परीक्षा में अनुर्त्तीण इंसा न पाता कही  मान भार
जग विजय तेरी चाहत नही इससे कोई राहत नही
नाम दिलों में गर सम्मानित लिखावेगा सकूं पावेगा
परीक्षा उत्तर मत खोज अन्यत्र तेरे नख नख पर हैं
नख अपने किधर उठाये,डुबोये चुनी राह तूने खुद हैं
संघर्ष सदैव चले नजरे न थमे भटकाते जग पर हैं
------------------जीवन में हर पग पर हैं
पथिक   अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
ब्लाग सूनी राह का पथिक https://jasmehblogspot.com

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