काश दुनिया के इतिहास में न जन्म लेता यह अंहकार कभी
काश: दुनिया मे प्यार होता पर उसमें न होता व्यापार कभी
मकसदे प्यार व्यापार मात्र दुनियायी
साजोसंवार का होता है
बिखरे खुश्बू हर शै में जहाँ निस्वार्थ सेवा का दरबार होता हैं
कर सेवा भूल जाना ,नजरे नीचे गिराना बहुत कठिन होता हैं
सेवा मध्य तेरे विचार व्यवहार निगरानी में बाद यादें होती हैं
न सोच किसी मुश्किले वक्त की गई सेवा
मूल्य तुम पावोगे
हालात ऐसी मे तुम सेवक न, इतिहास में व्यापारी कहलावोगे
दुर्गन्ध सुगन्ध तुझ में बसी फैसला तुम्हारा, क्या बन जावोगे
जहान देख रहा आ जग में सेवा में कितने स्वहित बिसरावोगे
स्वहित,मोह,लोभ,अंह व प्रदर्शन सेकिस सीमा तक बच पावोगे
पथिकअनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
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