न भुलाना कभी एहसान उस सीढी का
जिसने बुलन्दी पर तुम्हें पहुँचाही दिया
हर इंच बेजबान सीढी का तुम्हारी उन
गर्म सांसों व महक का मूक गवाह बना
साथ दिया व भार सहा हर इंच ने वर्ना
कही गिर कर तुम कराह रहे होते यार
जियो हर सांस रख मान उस सीढी का
अवश्य तुम बुलन्दियों को पा जावोगे
गर अंह- गिरफ्त में खोये गिर जावोगे
बेचारी सीढी को दुखी तुम कर जावोगे
पथिक
अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी )
ब्लाग –
सूनी राह का पथिक
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें