गुरुवार, 20 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ६६० -- भार सहा हर इंच ने वर्ना ---- पथिक अनजाना

न भुलाना कभी एहसान उस सीढी का
जिसने बुलन्दी पर तुम्हें पहुँचाही दिया
हर इंच बेजबान सीढी का तुम्हारी उन
गर्म सांसों व महक का मूक गवाह बना
साथ दिया व भार सहा हर इंच ने वर्ना
कही गिर कर तुम कराह रहे होते यार
जियो हर सांस रख मान उस सीढी का
अवश्य तुम  बुलन्दियों को पा जावोगे
गर अंह- गिरफ्त में खोये गिर जावोगे
बेचारी सीढी को दुखी तुम कर जावोगे
पथिक   अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी )
ब्लाग सूनी राह का पथिक


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