आज कुछ शब्दों के मायाजाल में पथिक जाकर उलझा
शब्द स्वामित्व, नियंत्रक व साक्षी को ले सामने आया
किसी वस्तु,स्थान,घटना आदि पर इंसान हावी न रहा
जो कुछ आज हैं या घटा बह तो कल वहाँ नही रहेगा
अत: स्वामित्व कैसा फिर नियंत्रक कैसे कहा जावेगा
मत अभिमान कर तू असफल अवरोधक जाना जावेगा
कहते सही कि अधिकृत व पास सब कुछ पर ?????
यही हालात परिवारों में गुजर रहे कर्ता सदैव डरता हैं
परिवारकर्ता / खुदा विवशत: मूक दर्शक बन रह गया
रे प्रमुख तेरी कथा रचियता आंखों से व्यथा कह गया
जो कुछ हैं या घट रहा या घटा वह साक्षी हो सह गया
स्वामी नही ,नियंत्रक नही साक्षी खुद को कह गया
--- पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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