बुधवार, 12 नवंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक – ६५१ -- यार बदल जाता है - पथिक अनजाना

शिकायत की यार से पा बेहत्तर मनोमष्तिक रूबरू हो
किसी मसले पर आ बैठ करते सलाह लेने को फैसला
पर वक्त जब फैसले के अमल का यार बदल जाता है
बिना किये इशारा या बात सामने प्रतिपक्षी के बदलते
जब फैसला लेना अपनी मर्जी  का तो मगजमारी क्यों
जवाब दिया यार ने मासूमियत से यह मेरी  आदत हैं
न कोई लोभ या हालात करते पर बदल जाना फितरत
वजह सिर्फ हम प्रतिपक्षी की आर्थिक स्थिति तौलते हैं
क्या बतावें यार बुरा न मानो हम चापलूसी में बोलते हैं

पथिक   अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी )

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