शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक – ६२५ - उलझावों पर नियंत्रण हैं--- पथिक अनजाना

हर कर्म को क्रियान्वयन से पूर्व कसौटी में से गुजरना हैं
हर बातको कहने सोचने से पूर्व दूरगामी प्रभाव देखना हैं
हर पल इंसानी देनदारियों सूची को निहारना विचारना हैं
करीब गुजरे व गुजरते हर रिश्तोंमित्रों मुस्कानें फैलानी हैं
नित्य जायज मांगों को अपनी क्षमता से क्रमित करना हैं
हर कदम परचलते शीतयुद्ध के मोहरों पर नजरें रखनी हैं
साथ सजायें हंसते, भुगते हर कदम सुराह पर जमाना हैं
मैं जिन्दगी मेंसे सफल गुजरते इंसा की तारीफ करता हू
इतने चंहुओर युद्धों चक्रव्यूहों से नियंत्रित हो निकलता हैं
इंसा वास्तव में तेरी मुस्कानें महान कयानात की शान हैं
ब्लाग  --  सूनी राह का पथिक
पथिक अनजाना



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