चाहत हैं मेरी हर करीबी से होवे नफरत का नाता
न कुछ किया लिया पाया खोया सोया
रोया बोया हैं
चाहत अपने दूर करे हमें इसमें उनका
कुछ न जाता
रूह
कर जल्दी जुदा दुनिया के पहरे रास नही आये
मैं बन्दा तेरा खुदा जुल्मों के
खात्मे की आस लगाये
कडवी
सच्चाई दोस्त मानवीय जीवन जीने की मानो
भाग्य व लक्ष्मी साथ नही पत्नी दूर
निश्चित जानो
कहते पथिक क्यों बेनकाब करते हो
भटके विचारों को
भटकन बचाने हेतू बहुतेरा पेश जाती
पीढियों ने किया
ग्रन्थ, मूरत पूज दिये पर नही
विचारों को धार लिया
जख्म नसूर न बने ताजे करे पथिक
जिसे दोष दिया
ब्लाग --
सूनी राह का पथिक
पथिक अनजाना
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