बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक - ६२३ -- दुखयारी आत्माऔ के साथ — पथिक अनजाना

हर चुम्बन का मायने वक्त वक्त पर सदा अलग होता हैं
चुम्बन खुदा की राह देवदूतों के चरणों हाथों पर बरसाते हैं
चुम्बन बुजुर्गों की शुभाषीश पाने सम्मानित उनको करतेहैं
चुम्बन बच्चों प्रियों के हक में इंसानी जजबात लहराते हैं
देकर चुम्बन दुर्विचारी जाने क्यों गलत अर्थ लगा जाते हैं
यह एहसास या कशिश यह तो देने लेने वाले ही जानते हैं
क्यों खुद को बेनकाब करते हो क्या जानो चुम्बन क्या हैं
जहाँ जलन कुढन  सडन हो खुदा को कैसे बसा सकते हो
दुखयारी आत्माऔ के साथ जब मिल बैठते भले इंसान हैं
अपनी महकती जिन्दगी के चन्द लम्हों को उनमें खोते हैं
बजाय खुशी के व्यवहारों विचारों रिश्तों में खोजते गम हैं
थोथी खुशियाँ धारकर नही जानते गम भी आपकी देन हैं
काश : गैरों मे खुद को जब पहचानो तो गम जुदा होता हैं
ब्लाग --  सूनी राह का पथिक
पथिक अनजाना


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