मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक - ६२२ -- निर्मित करते खुदा हैं --- पथिक अनजाना

समुद्री जीवों पंछियों जगह जगह बसे कीडे मकोडों की
इनकी दुनिया की सबसे भली बात मुझे यही लगी कि
इनका कोई अपना पराया न कही इस जग में होता हैं
सब इनके अपने होते व वही दोस्त दुश्मन व पराये हैं
 न चिन्ता अपनों से धोखे या कुछ खोने का होती हैं
भय में जीते यह भी भय शस्त्र अचूक ब्रम्हाण्ड में हैं
चल अचल या पा वरदान अमर छाया सब पर भय की
भयभीत तप करते पूजा करते ये निर्मित करते खुदा हैं
पाया प्यार हैं जिसे भय भयभीत न कभी कर पाया हैं
छोडो सारे मेले व झमेले नजरों को प्यार से सजाया हैं
बदनाम न करो यारों प्यार को जिसे मैंने अपनाया हैं
ब्लाग --  सूनी  राह का पथिक
पथिक अनजाना


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