रविवार, 12 अक्टूबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ६२० -- हर धुरी के पीछे जग --- पथिक अनजाना

जब पत्नी बेरूखी ऊची आवाज में पति से बात करती हैं
तो बच्चे हंसकर इस वाक्ये को नजर अंदाज कर जाते हैं
जब पति बेरूखी ऊची आवाज में पत्नी से कभी बात करे
तो निश्चित मानें बच्चे अवश्य बाप पर क्रोधित हो जावेंगें
अपने स्वभावसे बच्चे घर,बाहर, हमउम्रों में स्थान बनायेंगें
देखा अनेकों बार घरमें हर बच्चे का स्वभाव अलग होता हैं
पृष्ठभूमि,वातावरण सम फिर क्यों इक हंसता दूजा रोता हैं
इकखो लेने को दूजा खो देने को बच्चा तैयार क्यों होता हैं
खुदा ने यह रचना कैसी रची सोता जागता जागता सोता हैं
बलिहारी जग वालों की हर धुरी के पीछे जग खडा होता हैं
ब्लाग --  सूनी राह का पथिक

पथिक अनजाना

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