वरीयता
कैसी हो जिन्दगी की हर दिन की पहली शर्त होती हैं
प्रतिदिन सुकर्मों करने की शपथ से
तुम दिन की शुरूआत करो
बाद इसके हो फैसला काज वरीयता का
चाहे अपना या गैर का
करें प्रयास निश्चित मानें चिन्ताऔं
व दुश्मन मैदान छोड देगा
खुशी व सफलता से परिवार को सुखी
जीवन का एहसास होगा
पर चलना संभलकर मित्र गिर्द
तुम्हारे र्इष्यालुओं का वास होगा
न प्रतीक्षा, परीक्षा ,प्रशिक्षा
की जरूरत निर्णय सबको रास होगा
ब्लाग -- सूनी राह का पथिक
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
यदि उदगार को
रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें
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