लिखना सजाना रचना भी जग में क्या अजीब नशा
मनोरंजनार्थ कर नशा महफिल में नाचना चाहते हैं
तमाशबीन बिन महफिल ज्यों खोट बिन स्वर्णमाला
अनेक दर देखे किया फैसला महफिल खुद सजायेगे
इंसा,जानवर, पक्षी विचारों की कब्र पर कोई तोआयेगें
माना कि यहाँ समस्याओं से अवकाश कहाँ किसी को
किन्तु अनुभव मेरे तोआशाओं के दीप जलाये रहते हैं
पथिक अनजाना
ब्लाग -- सूनी राह
का पथिक
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