रविवार, 26 अक्टूबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक – ६३४ खुद का नाम भूल —पथिकअनजाना

नही चाहिये नेता ऐसा जो मांगे जनता से देश खातिर
राज-भिखारी न बनें प्रजा संतान हैं न किहो केला ख्याले
धकियाये आम जनता को पर खुद आदर्शता को न पालें
हो वह परे राजनेता धार्मिक समाज या समुदायिकता से
सब्जबाग की बात न करें राह दिखावे जनहौसला बढावें
पाये जब हीरे बटोरने लगे ताज जा यादों में बस जाताहैं
झोपडपट्टियों में सांसे लेने वाला पसीने की खुश्बू जानता
न विदेशी बैंकों की तिजोरी, जनसुख को तिजोरी मानता
न नभ की ऊचाईयाँ, खुद का नाम भूल गहन भू छानता
जीवन,समाज की परेशानियाँ हल कर जाये तो नेता माने
ब्लाग --  सूनी राह के पथिक
पथिक अनजाना
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