जो प्यासा हर मुकाम पर ही
रहा जीवन भर में
चाह कर भी कैसे बांटें प्यार
दुनिया की राह में
उसे भी तलाश कि
कोई आ प्यार से भर जावे
सूखे से उम्मीद कैसी जो
संसार प्यास बुझावे
मरूस्थल काँटे देता तो रात
ठण्डक भी देता हैं
तेज आंधियाँ मरूस्थल की
रेखायें बदलती हैं
प्यासे के अनुभवों से
जिन्दगी इंसानी सम्हलती
न खनकते सिक्के महफिलों में
साकी बेहाल हैं
प्यासी जिन्दगी मयखाने खोये
जीवन सफर में
--------------------------जीवन
भर में
ब्लाग -- सूनी राह के पथिक
पथिक अनजाना
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें