बुधवार, 3 दिसंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ६७३ -- रहनुमा दिखावटी हैं यार --- पथिक अनजाना

कहा जाता निराशा तो मायूसी की आग हैं
जब इंसान खुशनुमां चेहरे की नकाब ओढे
खुश जमाने के साथ महफिल में शरीक हो
जब निराशावादी हकीकत की नकाब में रह
वो जमाने की महफिल से दूर भाग जाता हैं
जमाना झूठे चेहरों मोहरों को तलाशता रहता
निराशावादी झूठी नकाब से नफरत करता हैं
जग में स्वघोषित रक्षक रहनुमा दिखावटी हैं
अधिकांशये भक्षक जिन पर जग को नाज हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)



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