मंगलवार, 5 जनवरी 2016

अभिव्यक्ति क्रमांक ७७० - बने अनुचित साज हैं -- पथिक अनजाना

सत्य कहा या कही मैंने सुना /पढा सच्चाई जो सामने रखी गई
जो इतिहास बनाया करते वो रूकते नही कभी लिखने के लिए कही
इतिहास जो लिखा करते है वे सच्चे इतिहास से अनजान रहतेहैं
अनजान इतिहास आगाज अनजान क्षेत्र अनजान जाने क्या राज
बना बेवकूफ लिख झूठी इबारतें नही जानते बने अनुचित साज हैं
पर्दा जब उठेगा सोचें जनसाधारण व्दारा किस तरह नकारे जायेंगी
इतिहास गैर का सजाते रहे इतिहास मे खुद अपमानित हो जायेंगें
धिक्कार हैं शिक्षा संस्कारों विचारों को जो  सिर आपका झुकायेगें
प्रस्तुत उदगार रचियता कि प्रकाशित पुस्तक
सूनी राह का पथिक का अंश हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)


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