सोमवार, 30 नवंबर 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक ७६६ - आप आनन्दित हो जायेंगें – पथिकअनजाना

बार कई मैंने सोचा कि इस बाजार से ले क्या जायें हम
कहते थे कोई महापुरूष साथ तेरे तेरी गलतियाँ जायेंगी
करेगा जोअच्छा तू बन्दे यहाँ लौट कर तेरे पास आयेंगी
मंथन में पाया साथ नाम तेरे गलतियाँ याद की जायेंगी
सुख दु:ख घडियाँ कही और नही तूझे यही मिल जायेंगी
फैसला करे कुछ ऐसा जो मेरे दिल की चर्खी कहलायेगी
इस चर्खी पर लपेट सुकर्मों के सुलझे धागे  काम आवेंगें
सफर जिन्दगी आसां,कदमों, नाम को मान मिल जायेंगें
देख न रोयंगें न इर्ष्या, क्रोध मे जलेंगें खोयेंगें न पायेंगें
मस्ती ,प्यार से महकेगा दिल आप आनन्दित हो जायेंगें
कहें जग वाले बाँवरा हुआ सूनी राह का पथिक कहलायेंगें
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें