मंगलवार, 9 दिसंबर 2014

अभिव्यक्ति क्रमांक ६७९ -- लाये काँच या मोती-----पथिक अनजाना

न आयु हर इंसान की उष्मान में रहती हैं
न आय हर इंसान की वर्तमान में रहती हैं
सत्य जिन्दगी इंसा की असामान्य रहती हैं
आयुष्मान पा जाने में वक्त बर्बाद न करो
लम्हे मौत के लिये करोडों लम्हे गुजरते हैं
दुखों-सुखों का क्रय-विक्रय करोडों लम्हों में
इंतजारे मौत केबाजार में बेची जाती रोटी
समझ आपकी धन लाये काँच या मोती हैं
पथिक अनजाना


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